तुम ही बता दो यारों मेरे, ऐसा वक़्त कभी क्या आता है, एक दोस्त बनाने के खातिर, अपने प्रेमी को कोई ठुकराता है?? सच्चे रिश्तों में हो झूठ की दस्तक, तो विश्वास नही बन पाता है, निःसंदेह अगर हो इमान किसी का, तो सीताराम वो कहलाता है.. ......ओपिन्द कुमार..........
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