Saturday, 21 January 2017

मेरी तस्वीर को

मेरी तस्वीर को अक्सर नज़र से दूर करती है,
सुना है आज भी वो मेरे नाम की सिंदूर भरती है,
और रचा ली थी अगर उसने बड़े ही शौक से मेहँदी,
तो आखिर कौन सी बात है जो उसे मजबूर करती है..
..............ओपिन्द कुमार.....

यूँ हँस कर मुझको जलाना

मेरे ख्वाबों में आना------ छोड़ तुम क्यों नही देते,नजर नजरों से चुराना...... छोड़ तुम क्यों नही देते,नही टोका कभी मैंने........तुम्हारे हाल को लेकर,यूँ हँस कर मुझको जलाना ....छोड़ तुम क्यों नही देते......................ओपिन्द कुमार...................