नशा बहुत है तेरे इन,
मीठी-मीठी बातों में,
मुझे याद बहुत तुम आते हो,
अक्सर इन काली रातों में...
इन रातों से जैसे कोई,
तेरा मेरा नाता हो गहरा...
सोने न दें ये रातें मुझको,
जैसे आँखों पर तेरा हो पहरा...
तन-मन मेरा ठिठुर रहा है..
सर्द भरी इन रातों में...
याद बहुत तुम आते हो..
अक्सर इन काली रातों में...
मंद हँसी में छवि तुम्हारी..
उतर रही इन आँखों में..
भीग रही है काया तेरी...
तेरी यादों की बरसातों में...
दिन तो सारा गुज़र ही जाए...
इधर-उधर की बातों में..
मुझे याद बहुत तुम आते हो..
अक्सर इन काली रातों में..
.........ओपिन्द कुमार.....
मीठी-मीठी बातों में,
मुझे याद बहुत तुम आते हो,
अक्सर इन काली रातों में...
इन रातों से जैसे कोई,
तेरा मेरा नाता हो गहरा...
सोने न दें ये रातें मुझको,
जैसे आँखों पर तेरा हो पहरा...
तन-मन मेरा ठिठुर रहा है..
सर्द भरी इन रातों में...
याद बहुत तुम आते हो..
अक्सर इन काली रातों में...
मंद हँसी में छवि तुम्हारी..
उतर रही इन आँखों में..
भीग रही है काया तेरी...
तेरी यादों की बरसातों में...
दिन तो सारा गुज़र ही जाए...
इधर-उधर की बातों में..
मुझे याद बहुत तुम आते हो..
अक्सर इन काली रातों में..
.........ओपिन्द कुमार.....
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