सोचे निशानी लाने को गजरे को,
हम भूल गए तेरे बालों मे,
अपनी उंगली की बेचैनी को,
हम भूल गए तेरे बालों मे,
सब कुछ भूले पर 'कुछ' न भूले,
पर जाने क्यों हम वो 'कुछ' न भूले,
अब क्या बतलाएं जो 'कुछ' था याद,
हम भूल गए तेरे बालों मे,
शिला पर गढ़ने की कोशिश थी,
तेरी सूरत उभरी थी हाथों के छालों में,
जितने दर्द थे हाथों के छालों मे,
हम भूल गए तेरे बालों मे,
भाग्य लकीरे हम हाथों की,
हम भूल गए तेरे बालों में,
जितने दिन आये सावन के सालों मे,
हम भूल गए तेरे बालों में,
ओर संवारो तुम बेशक इनको,
ढूढ़ दो मुझको जो इनमें मैं गुम हूँ,
कुछ तो कम है मुझमे अब जो,
हम भूल गए तेरे बालों में,
सांसो मे घुलती मादक खुशबू,
तेरे बालों की लताओं की,
ऐसी खुशबू ओर कहाँ अब जो,
हम भूल गए तेरे बालों मे,
ऊँगली की उस सरगम सी हरकत पर,
नांच रहे थे मोर से बाल तेरे,
सरगम की वह अनुरागी मनमानी,
हम भूल गए तेरे बालों में,
मन की सारी अभिलाषाएं अपनी,
जो जीवन को जीने की ठानी थी,
अभिलाषाओं की वो उठती रवानी,
हम भूल गए तेरे बालों में,
कितना बहके, कितना सम्भले,
हम भूल गए तेरे बालों में,
मन के खारे पीड़ा के व्यथा को,
हम भूल गए तेरे बालों में,
ओपिन्द...
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