कहाँ गया वो प्यार तुम्हारा,
जब मैं था सारा संसार तुम्हारा,
मेरे हाथों में तुम हाथ थे देते,
और कहते न छूटे ये साथ हमारा,
जब मैं था सारा संसार तुम्हारा,
मेरे हाथों में तुम हाथ थे देते,
और कहते न छूटे ये साथ हमारा,
तौल दिया तूने प्यार को मेरे,
नये पुराने के दस्तूरों में,
अब न रहा मैं प्राण सा प्यारा,
कहाँ गया वो प्यार तुम्हारा,
सूरज कैसे प्रकाश बिखेरे,
जब ग्रहण सा उस पर हो अँधियारा,
इसी हाल में है प्यार हमारा,
कहाँ गया वो प्यार तुम्हारा,
हम मिलेंगे तुम मिलोगे,
प्यार भरी कुछ बातें होंगी,
टूट गया सब ख्वाब हमारा,
कहाँ गया वो प्यार तुम्हारा...
......ओपिन्द कुमार...
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